विस्तृत उत्तर
उपनिषद वेदों का सर्वोच्च और अंतिम भाग हैं, इसीलिए इन्हें वेदांत भी कहते हैं। 'उपनिषद' का अर्थ है — गुरु के पास समीप बैठकर प्राप्त किया गया ज्ञान।
संख्या की दृष्टि से उपनिषदों की कुल संख्या 1180 तक मानी जाती है, परंतु वर्तमान में 108 उपनिषद उपलब्ध हैं। इन 108 में से — ऋग्वेद के 10, कृष्ण यजुर्वेद के 32, शुक्ल यजुर्वेद के 19, सामवेद के 16 और अथर्ववेद के 31 उपनिषद हैं।
मुख्य उपनिषदों की संख्या पर मतभेद है। आदि शंकराचार्य ने जिन 10 उपनिषदों पर भाष्य लिखा, वे 'दशोपनिषद' के नाम से प्रसिद्ध हैं और इन्हें सर्वाधिक प्रामाणिक माना जाता है — ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुंडक, मांडूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छांदोग्य और बृहदारण्यक।
कुछ विद्वान इनमें श्वेताश्वतर और कौषीतकी को जोड़कर 12 मुख्य उपनिषद मानते हैं। मांडूक्य उपनिषद — जिसमें केवल 12 मंत्र हैं — को गौडपादाचार्य और शंकराचार्य ने अत्यंत महत्वपूर्ण माना है। बृहदारण्यकोपनिषद सबसे विशाल और छांदोग्योपनिषद सबसे लंबे गद्य-उपनिषद हैं।
मुख्य उपनिषदों का सार है — ब्रह्म और आत्मा का संबंध, जगत का स्वरूप और मोक्ष का मार्ग।



