विस्तृत उत्तर
## हिंदू धर्म में ज्ञान क्या है?
ज्ञान के दो स्तर (मुण्डकोपनिषद 1/1/4-5)
### परा विद्या (Higher Knowledge)
जिसके द्वारा अक्षर ब्रह्म का साक्षात्कार हो — यह परा विद्या है। यह आत्मा और ब्रह्म की एकता का ज्ञान है। यही मोक्षदायी ज्ञान है।
### अपरा विद्या (Lower Knowledge)
वेद, व्याकरण, ज्योतिष, कल्प, निरुक्त आदि शास्त्रों का ज्ञान — यह सांसारिक जीवन में उपयोगी है, किंतु यह अंतिम सत्य नहीं है।
गीता में ज्ञान
गीता (4/38) में श्रीकृष्ण कहते हैं:
*'न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।'*
— इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कुछ भी नहीं है।
गीता (13/2) में 'क्षेत्र' (शरीर) और 'क्षेत्रज्ञ' (आत्मा) का विवेक ही सच्चा ज्ञान बताया गया है।
ज्ञान के 20 लक्षण (गीता 13/8-12)
नम्रता, अहंकारहीनता, अहिंसा, क्षमा, सरलता, गुरुसेवा, शौच, स्थिरता, इंद्रिय-संयम, वैराग्य, जन्म-मृत्यु में दुःख का दर्शन — इत्यादि।
ज्ञान के प्रकार
- ▸सात्विक ज्ञान (गीता 18/20) — समस्त प्राणियों में एक ही अव्यय तत्त्व का दर्शन
- ▸राजसिक ज्ञान (18/21) — विभिन्न जीवों में भेद देखना
- ▸तामसिक ज्ञान (18/22) — एक कार्य को ही सब कुछ समझना
ज्ञान का फल
गीता (4/36-37) — ज्ञानरूपी नाव से पाप-सागर पार हो जाता है; ज्ञानाग्नि से सभी कर्म जलकर भस्म हो जाते हैं।





