विस्तृत उत्तर
मोक्ष क्या है?
शब्द-अर्थ
मोक्ष' = संस्कृत 'मुच्' धातु से — मुक्त होना। मोक्ष = जन्म-मृत्यु के अनंत चक्र (संसार) से पूर्ण मुक्ति।
परिभाषा
मोक्ष सनातन धर्म का चरम पुरुषार्थ है — धर्म, अर्थ, काम के बाद मोक्ष जीवन का अंतिम और श्रेष्ठ लक्ष्य है। इस अवस्था में आत्मा परमात्मा (ब्रह्म) में विलीन हो जाती है और पुनर्जन्म का बंधन सदा के लिए समाप्त हो जाता है।
मोक्ष के चार मार्ग (गीता के अनुसार)
- 1कर्म योग — निष्काम कर्म से
- 2ज्ञान योग — आत्म-साक्षात्कार से
- 3भक्ति योग — ईश्वर-प्रेम और समर्पण से
- 4राज योग — ध्यान और समाधि से
दार्शनिक मत
- ▸अद्वैत वेदांत (शंकराचार्य): आत्मा और ब्रह्म एक हैं — *'अहं ब्रह्मास्मि'*। यह भेद-बुद्धि अज्ञान है। ज्ञान से यह भेद नष्ट होना ही मोक्ष है।
- ▸विशिष्टाद्वैत (रामानुज): आत्मा ईश्वर में विशिष्ट अंश के रूप में मिलती है।
- ▸द्वैत (मध्वाचार्य): जीव और ईश्वर सदा भिन्न; भक्ति से मोक्ष।
मोक्ष के लक्षण
- ▸सभी कर्म-बंधनों से मुक्ति
- ▸आनंद की परम अवस्था — *सच्चिदानंद*
- ▸पुनर्जन्म का अंत
- ▸भय, शोक, इच्छा से परे
गीता 18.66
*'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।*
*अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।।'*
सब धर्म छोड़कर मेरी शरण में आ — मैं तुझे समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा।





