विस्तृत उत्तर
धर्म का अर्थ क्या है?
शब्द-व्युत्पत्ति
धर्म' = संस्कृत 'धृ' धातु से — जो धारण करे, जो टिकाए, जो समाज और सृष्टि को संतुलित रखे। धर्म केवल पूजा-पद्धति या मज़हब नहीं — यह सही आचरण, कर्तव्यबोध और नैतिक जीवन-पद्धति है।
प्रमुख परिभाषाएँ
1मनुस्मृति (6.92) — दस लक्षण
*'धृतिः क्षमा दमो अस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीर्विद्या सत्यं अक्रोधो दशकं धर्म लक्षणम्।।'*
धैर्य, क्षमा, आत्मसंयम, अचौर्य, पवित्रता, इन्द्रिय-निग्रह, सद्बुद्धि, विद्या, सत्य, अक्रोध — ये दस धर्म के लक्षण हैं।
2वैशेषिक दर्शन (महर्षि कणाद, 1.1.2)
*'यतोऽभ्युदयनिःश्रेयससिद्धिः स धर्मः।'*
जो लोक में उन्नति और परलोक में निःश्रेयस (मोक्ष) दिलाए — वह धर्म है।
3महाभारत-अनुशासन पर्व (115.23)
*'अहिंसा परमो धर्मः।'* — अहिंसा सर्वोच्च धर्म है।
4भगवद्गीता
*'श्रेयान् स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।'* (3.35) — गुण-रहित स्वधर्म भी भलीभाँति पालित परधर्म से श्रेष्ठ है।
धर्म के प्रकार
- ▸सनातन धर्म: सत्य, अहिंसा, दया — सर्वकाल के लिए
- ▸स्वधर्म: व्यक्ति की भूमिका के अनुसार कर्तव्य (विद्यार्थी, गृहस्थ, राजा)
- ▸वर्णाश्रम धर्म: वर्ण और आश्रम के अनुसार
- ▸युग-धर्म: काल और परिस्थिति के अनुसार बदलता है
उपनिषद
*'न हि सत्यात् परो धर्मः'* — सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं।
सारांश
धर्म = जो आत्मा को, समाज को और सृष्टि को धारण करे। यह न केवल पूजा है, न केवल नियम — यह जीवन को सत्य, करुणा और न्याय के साथ जीने की कला है।





