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कर्तव्य — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 3 प्रश्न

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सनातन सिद्धांत

धर्म का अर्थ क्या है?

धर्म = 'धृ' धातु — जो धारण करे/टिकाए। कर्तव्य + नैतिकता + सही आचरण। मनुस्मृति: 10 लक्षण (धैर्य, क्षमा, सत्य, अहिंसा...)। कणाद: जो उन्नति और मोक्ष दे। महाभारत: 'अहिंसा परमो धर्मः'। गीता: स्वधर्म ही श्रेष्ठ। उपनिषद: 'न हि सत्यात् परो धर्मः'।

धर्मस्वधर्मकर्तव्य
आत्मा और मोक्ष

कर्म योग से मोक्ष कैसे प्राप्त होता है गीता अनुसार

कर्म योग: गीता 2.47 — कर्म करो, फल की चिंता छोड़ो। कर्म ईश्वर को अर्पित (9.27), सुख-दुख में समान (2.48), स्वधर्म पालन (3.35)। निष्काम कर्म → चित्त शुद्धि → ज्ञान → मोक्ष। कमल पत्र जैसे — कर्म करो पर लिप्त मत हो (5.10)।

कर्म योगनिष्काम कर्मगीता
वेद ज्ञान

वेदों में धर्म का अर्थ क्या है?

वेदों में धर्म का मूल रूप 'ऋत' है — ब्रह्मांडीय सत्य-व्यवस्था जिसे वरुण देव संरक्षित करते हैं। 'धारयति इति धर्मः' — जो धारण करे, वह धर्म। मनुस्मृति (2/6) — 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — सम्पूर्ण वेद ही धर्म का मूल है।

धर्मवेदऋत

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।