ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
सनातन सिद्धांत📜 भगवद्गीता 3/5, 18/47, मनुस्मृति, महाभारत शांतिपर्व, भागवत पुराण2 मिनट पठन

हिंदू धर्म में कर्म का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

हिंदू धर्म में कर्म का अर्थ है — प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है। गीता (2/47) का संदेश है — 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' — फल की आसक्ति छोड़कर कर्म करो। कर्म ही पुनर्जन्म का कारण है और निष्काम कर्म मोक्ष का मार्ग है।

📖

विस्तृत उत्तर

## हिंदू धर्म में कर्म का महत्व

कर्म सिद्धांत हिंदू दर्शन का आधार-स्तंभ है। यह सिद्धांत बताता है कि प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है — न केवल इस जन्म में, बल्कि अगले जन्मों में भी।

### कर्म का मूल सिद्धांत

> 'यद्भावं तद्भवति' — जैसा भाव होता है, वैसा ही होता है।

> 'यत्करोति तत्फलमश्नुते' — जो कर्म करता है उसका फल भोगता है।

### भगवद्गीता में कर्म (3/5)

> 'न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।

> कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः॥'

अर्थात् — कोई भी मनुष्य एक पल भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता।

### कर्म के तीन प्रकार

| प्रकार | विवरण |

|--------|--------|

| संचित कर्म | अनेक जन्मों के एकत्रित कर्म |

| प्रारब्ध कर्म | वर्तमान जन्म में भोगने योग्य कर्म |

| क्रियमाण कर्म | अभी किए जा रहे नए कर्म |

### कर्मयोग — गीता का मुख्य संदेश

> 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।' (गीता 2/47)

> — कर्म करने में तेरा अधिकार है, फल में कभी नहीं।

यह निष्काम कर्म का सिद्धांत है — फल की आसक्ति छोड़कर कर्म करना।

### कर्म का पुनर्जन्म से संबंध

कर्म और पुनर्जन्म परस्पर जुड़े हैं:

  • जब तक कर्म-बंधन है, आत्मा बार-बार जन्म लेती है
  • निष्काम कर्म और ज्ञान से कर्म-बंधन कटता है
  • बंधन कटने पर मोक्ष प्राप्त होता है

### महाभारत में कर्म (शांतिपर्व)

> 'न दैवमपि देवेशो नृणां कल्याणकारकम्।

> आत्मनः कर्म यत्पूर्वं तस्य तत्फलमश्नुते॥'

कोई भी देवता मनुष्य का पूर्व कर्म बदल नहीं सकते — हर व्यक्ति अपने कर्म का फल स्वयं भोगता है।

### स्वधर्म का कर्म

> 'श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्' (गीता 18/47)

> — अपना स्वधर्म (कर्तव्य) कम गुणयुक्त हो तो भी दूसरे के अच्छे कर्म से श्रेष्ठ है।

📜
शास्त्रीय स्रोत
भगवद्गीता 3/5, 18/47, मनुस्मृति, महाभारत शांतिपर्व, भागवत पुराण
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

कर्मकर्म सिद्धांतहिंदू धर्मगीतापुनर्जन्मधर्म

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

हिंदू धर्म में कर्म का क्या महत्व है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको सनातन सिद्धांत से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर भगवद्गीता 3/5, 18/47, मनुस्मृति, महाभारत शांतिपर्व, भागवत पुराण पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।