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उपनिषद📜 मुक्तिकोपनिषद (1.30-36), मुख्य उपनिषद — विकिपीडिया2 मिनट पठन

उपनिषद कितने हैं?

संक्षिप्त उत्तर

मुक्तिकोपनिषद में 108 उपनिषद (ऋग्-10, शुक्लयजु-19, कृष्णयजु-32, साम-16, अथर्व-31)। आज 200+ उपलब्ध। मुख्य 10-13 (शंकराचार्य ने 10 पर भाष्य)। सबसे छोटा: माण्डूक्य (12 श्लोक)। सबसे बड़ा: बृहदारण्यक। 'सत्यमेव जयते' — मुण्डकोपनिषद।

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विस्तृत उत्तर

उपनिषदों की संख्या

उपनिषदों की संख्या के विषय में विद्वानों में मतभेद है, किंतु परंपरागत प्रामाणिक संख्या निम्न प्रकार है:

1मुक्तिकोपनिषद में 108

मुक्तिकोपनिषद (1.30-36) में 108 उपनिषदों की प्रामाणिक सूची दी गई है। वेद के अनुसार इनका वितरण:

  • ऋग्वेद: 10 उपनिषद
  • शुक्ल यजुर्वेद: 19 उपनिषद
  • कृष्ण यजुर्वेद: 32 उपनिषद
  • सामवेद: 16 उपनिषद
  • अथर्ववेद: 31 उपनिषद

2आजकल 200 से अधिक उपलब्ध

वर्तमान में 200 से अधिक ग्रंथ 'उपनिषद' नाम से ज्ञात हैं, किंतु इनमें से 108 ही प्रामाणिक माने जाते हैं।

3मुख्य उपनिषद — 10 या 11 या 13

  • आदि शंकराचार्य ने 10 उपनिषदों पर भाष्य (टीका) लिखा।
  • अधिकांश परंपराएँ 11 उपनिषद मुख्य मानती हैं।
  • आधुनिक विद्वान 13 उपनिषद मुख्य मानते हैं।

मुख्य उपनिषद (11) के नाम

ईशावास्य, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छांदोग्य, बृहदारण्यक, और श्वेताश्वतर।

विशेष तथ्य

  • सबसे छोटा उपनिषद: माण्डूक्योपनिषद (केवल 12 श्लोक)
  • सबसे बड़ा उपनिषद: बृहदारण्यकोपनिषद
  • राष्ट्रीय वाक्य 'सत्यमेव जयते' — मुण्डकोपनिषद से लिया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
मुक्तिकोपनिषद (1.30-36), मुख्य उपनिषद — विकिपीडिया
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