विस्तृत उत्तर
उपनिषदों की संख्या
उपनिषदों की संख्या के विषय में विद्वानों में मतभेद है, किंतु परंपरागत प्रामाणिक संख्या निम्न प्रकार है:
1मुक्तिकोपनिषद में 108
मुक्तिकोपनिषद (1.30-36) में 108 उपनिषदों की प्रामाणिक सूची दी गई है। वेद के अनुसार इनका वितरण:
- ▸ऋग्वेद: 10 उपनिषद
- ▸शुक्ल यजुर्वेद: 19 उपनिषद
- ▸कृष्ण यजुर्वेद: 32 उपनिषद
- ▸सामवेद: 16 उपनिषद
- ▸अथर्ववेद: 31 उपनिषद
2आजकल 200 से अधिक उपलब्ध
वर्तमान में 200 से अधिक ग्रंथ 'उपनिषद' नाम से ज्ञात हैं, किंतु इनमें से 108 ही प्रामाणिक माने जाते हैं।
3मुख्य उपनिषद — 10 या 11 या 13
- ▸आदि शंकराचार्य ने 10 उपनिषदों पर भाष्य (टीका) लिखा।
- ▸अधिकांश परंपराएँ 11 उपनिषद मुख्य मानती हैं।
- ▸आधुनिक विद्वान 13 उपनिषद मुख्य मानते हैं।
मुख्य उपनिषद (11) के नाम
ईशावास्य, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छांदोग्य, बृहदारण्यक, और श्वेताश्वतर।
विशेष तथ्य
- ▸सबसे छोटा उपनिषद: माण्डूक्योपनिषद (केवल 12 श्लोक)
- ▸सबसे बड़ा उपनिषद: बृहदारण्यकोपनिषद
- ▸राष्ट्रीय वाक्य 'सत्यमेव जयते' — मुण्डकोपनिषद से लिया गया है।





