विस्तृत उत्तर
उपनिषद क्या हैं?
शब्द-व्युत्पत्ति
उपनिषद्' = 'उप' (समीप) + 'नि' (निश्चय पूर्वक) + 'सद्' (बैठना)। अर्थात् — *गुरु के समीप बैठकर प्राप्त किया गया रहस्यमय ज्ञान।* शंकराचार्य के अनुसार इसका मुख्य अर्थ ब्रह्मविद्या है।
स्वरूप
उपनिषद वेदों के अंतिम और दार्शनिक भाग हैं। वे वेद के 'आरण्यक' और 'उपनिषद्-खंड' का हिस्सा हैं। इनमें ब्रह्म, आत्मा और जगत् के तत्त्वज्ञान का गहन विचार है।
विषय
- ▸ब्रह्म का स्वरूप — निर्गुण और सगुण
- ▸आत्मा का स्वरूप — 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि'
- ▸जगत् की माया और मिथ्यात्व
- ▸मोक्ष का मार्ग
- ▸गुरु-शिष्य संवाद-शैली में ज्ञान-दान
वेदांत क्यों कहते हैं?
उपनिषद वेद के अंत में (उत्तर भाग में) हैं, इसलिए इन्हें वेदांत भी कहा जाता है। ये वेद की उच्चतम निष्पत्ति हैं।
प्रस्थानत्रयी
भगवद्गीता, ब्रह्मसूत्र और उपनिषद — ये तीनों मिलकर वेदांत की प्रस्थानत्रयी कहलाते हैं।
विशेषता
उपनिषदों में कर्मकांड को गौण और ज्ञान को प्रधान बताया गया। 'स्थूल से सूक्ष्म की ओर', 'बाह्य से अंतर की ओर' — यही उपनिषदों का मार्ग है। इन्हें पढ़कर मैक्समूलर, शोपेनहावर जैसे पाश्चात्य विद्वान भी अभिभूत हुए।





