📖
विस्तृत उत्तर
तैत्तिरीय ब्राह्मण, अथर्ववेद और बृहदारण्यकोपनिषद् के अनुसार भूर्लोक और द्युलोक के मध्य, अंतरिक्ष से आगे तथा चंद्रमंडल के ऊपर स्थित मध्यम लोक को पितृलोक कहा गया है। मनुष्य, पितर और देवों के लोक पृथक-पृथक माने गए हैं। पितर इसी पितृलोक में निवास करते हैं और पितृयान मार्ग से वहाँ तक पहुँचते हैं।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





