विस्तृत उत्तर
उपनिषदों की एक वेदांतिक व्याख्या के अनुसार जब परब्रह्म को 'ॐ' रूपी पक्षी के रूप में ध्यान किया जाता है तो भुवर्लोक को उस पक्षी के घुटनों (knees) में स्थित माना गया है। इस रूपक में भूलोक पक्षी के चरणों में, भुवर्लोक घुटनों में, स्वर्लोक और उच्च लोक क्रमशः ऊपर के अंगों में स्थित माने गए हैं। भुवर्लोक का घुटनों में होना भी मध्यवर्ती और पारगमन अवस्था का ही प्रतीक है। जैसे घुटने शरीर के निचले और ऊपरी हिस्से के बीच की कड़ी हैं और गतिशीलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वैसे ही भुवर्लोक भौतिक और आध्यात्मिक जगत के बीच की कड़ी है और ब्रह्मांडीय गतिशीलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक




