विस्तृत उत्तर
ऋग्वेद विश्व का सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध ग्रंथ माना जाता है और चारों वेदों में सर्वप्रथम है। इसका समस्त ज्ञान देवताओं की स्तुति, प्रकृति की महिमा और दार्शनिक चिंतन से भरपूर है।
संरचना की दृष्टि से ऋग्वेद की शाकल शाखा के अनुसार — इसमें 10 मंडल, 85 अनुवाक, 1028 सूक्त (बालखिल्य सहित) और लगभग 10,552 से 10,627 मंत्र (ऋचाएँ) हैं। विभिन्न परंपराओं और गणनाओं में मंत्रों की संख्या थोड़ी भिन्न मिलती है — कुछ विद्वान 10,552, कुछ 10,580 और कुछ 10,627 बताते हैं।
मंडलों की बात करें तो प्रथम और दशम मंडल सबसे बड़े हैं जिनमें 191-191 सूक्त हैं। द्वितीय से सप्तम मंडल तक 'वंशमंडल' कहलाते हैं क्योंकि ये किसी एक ऋषि-वंश की रचनाएँ हैं। नवम मंडल पूर्णतः सोम को समर्पित है और 'पवमान मंडल' भी कहलाता है।
ऋग्वेद में अनेक ऐतिहासिक सूक्त हैं — नासदीय सूक्त (सृष्टि की उत्पत्ति पर दार्शनिक चिंतन), पुरुष सूक्त, श्री सूक्त, गायत्री मंत्र (7/62/10), महामृत्युंजय मंत्र (7/59/12) आदि। 'असतो मा सद्गमय' वाक्य भी ऋग्वेद से ही लिया गया है।
संपूर्ण ऋग्वेद में 33 कोटि देवी-देवताओं का उल्लेख है जिनमें इन्द्र और अग्नि के सूक्त सर्वाधिक हैं।





