विस्तृत उत्तर
समिधा वह पवित्र लकड़ी है जिसे जलाकर अग्नि प्रज्वलित की जाती है और जो हविष्य का आधार बनती है। ऋग्वेद (8.44.1) और यजुर्वेद (3.1) में स्पष्ट उल्लेख है: 'समिधाग्निं दुवस्यत घृतैर्बोधयतातिथिम्', अर्थात् समिधाओं के माध्यम से अग्नि को प्रदीप्त करना चाहिए।
सामान्य दैनिक हवन के लिए आम (मैंगीफेरा इण्डिका) की लकड़ी को सर्वाधिक सुलभ एवं प्रामाणिक माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र एवं यज्ञ-मीमांसा के अनुसार, विभिन्न ग्रहों की शांति तथा विशिष्ट फलों की प्राप्ति के लिए अलग-अलग वृक्षों की समिधाओं का विधान किया गया है। इसका तार्किक आधार इन वनस्पतियों में निहित विशिष्ट रासायनिक एवं औषधीय गुण हैं, जो अग्नि के संपर्क में आकर वायुमंडल में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं।


