विस्तृत उत्तर
महामृत्युंजय मंत्र के दो प्रमुख स्वरूप शास्त्रों में उपलब्ध हैं — एक विशुद्ध वैदिक स्वरूप और दूसरा तांत्रिक या सम्पुटित स्वरूप।
विशुद्ध वैदिक स्वरूप, जो ऋग्वेद में वर्णित है, ३२ अक्षरों से निर्मित है। इसके आरंभ में 'ॐ' (प्रणव) लगाने से यह ३३ अक्षरों का अत्यंत पवित्र 'त्रयस्त्रिशाक्षरी' मंत्र बन जाता है।
वैदिक मंत्र का मूल देवनागरी स्वरूप:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥





