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विस्तृत उत्तर
ॐकार और चारों वेदों का संबंध शरीर-रूपक के माध्यम से बताया गया है। ऋग्वेद को ॐकार का मुख कहा गया है, सामवेद को उसकी जिह्वा, यजुर्वेद को महाग्रीवा और अथर्ववेद को हृदय कहा गया है। इसी वर्णन में ॐकार को व्यापक, प्रकृति और पुरुष से अतीत तथा प्रलय और उत्पत्ति से रहित भी कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 15, श्लोक 20-21
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