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विस्तृत उत्तर
ॐकार को शब्दब्रह्म से जोड़ा गया है। शब्दब्रह्म ही इसका शरीर है और यह साक्षात् शब्दब्रह्म का प्रकाशक है। अकारादि से क्षकारान्त वर्ण इसके अवयव बताए गए हैं। यह अनेक रूपों में स्थित होकर भी अव्यक्त, परात्पर और सूक्ष्मातिसूक्ष्म कहा गया है। इसे अकार, उकार और मकारात्मक स्थूल शरीर वाला भी बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 1, PDF पृष्ठ 14-15, श्लोक 19-21
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