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विस्तृत उत्तर
हृदयकमल में शिव का ध्यान समाहितचित्त होकर करना चाहिए। साधक को परम शुद्ध दीपशिखा की आकृति वाले और ओंकार नाम से अभिहित परमात्मा का अपने हृदयकमल की कर्णिका में ध्यान करना चाहिए। आगे हृदयप्रदेश में महेश्वर का ध्यान बताया गया है। महादेव को निर्मल, अवयवरहित, ब्रह्मरूप, शान्त, ज्ञानस्वरूप, अनिर्देश्य, सूक्ष्म, कल्याणकारी, मोक्षस्वरूप और परात्पर कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 50-51, श्लोक 91 और 101-108
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