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विस्तृत उत्तर
शिव ध्यान शरीर के कई आंतरिक स्थानों में किया जाता है। साधक हृदयकमल की कर्णिका में परमात्मा का ध्यान कर सकता है। नाभि से नीचे उत्तम कमल में मण्डलों सहित ध्यान बताया गया है। नाभि, कण्ठ, भ्रूमध्य, ललाटपट्ट और मस्तक में भी विधि के अनुसार शिव का ध्यान करना चाहिए। हृदय में महेश्वर, नाभिकमल में सदाशिव, ललाट में चन्द्रचूड, भ्रूमध्य में शंकर और मूर्धा में शिव का ध्यान कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 50-51, श्लोक 91-101
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