विस्तृत उत्तर
शिव का ध्यान करते समय उनका स्वरूप अत्यन्त सूक्ष्म, निर्मल और परात्पर माना गया है। वे कला या अवयव से रहित, ब्रह्मरूप, शान्त, ज्ञानस्वरूप, लक्षणरहित, अनिर्देश्य, अणु से भी सूक्ष्म, कल्याणकारी, आश्रयरहित, तर्क से परे, उत्पत्ति-विनाश से रहित, मोक्षस्वरूप, परम गति, अमृतस्वरूप, अविनाशी, महानन्द, परानन्द, योगानन्द, स्वयंवेद्य, इन्द्रियों से परे और सभी उपाधियों से मुक्त बताए गए हैं। ऐसे महादेव का हृदयकमल में ध्यान करना चाहिए।
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