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दस वायु📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 48, श्लोक 63-66⏱ 1 मिनट पठन

नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय वायु क्या करते हैं?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

नाग डकार में, कूर्म नेत्र-उन्मीलन में, कृकल छींक में, देवदत्त जम्हाई में और धनंजय महाघोष में क्रियाशील बताया गया है।

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विस्तृत उत्तर

नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय पाँच उपवायु हैं। डकार आदि के समय क्रियाशील वायु नाग है। उन्मीलन यानी आँख खोलने की अवस्था में क्रियाशील वायु कूर्म है। छींक आदि में आने वाली वायु कृकल है। जम्हाई में क्रियाशील वायु देवदत्त है। महाघोष करने वाली वायु धनंजय है, जो मृत्यु के बाद भी सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त रहती है।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 48, श्लोक 63-66
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय वायु क्या करते हैं को संदर्भ सहित समझें

नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय वायु क्या करते हैं का सबसे सीधा सार यह है: नाग डकार में, कूर्म नेत्र-उन्मीलन में, कृकल छींक में, देवदत्त जम्हाई में और धनंजय महाघोष में क्रियाशील बताया गया है।

दस वायु जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 48, श्लोक 63-66 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 48, श्लोक 63-66 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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दस वायु श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

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यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

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