दस वायुनाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय वायु क्या करते हैं?नाग डकार में, कूर्म नेत्र-उन्मीलन में, कृकल छींक में, देवदत्त जम्हाई में और धनंजय महाघोष में क्रियाशील बताया गया है।#नाग#कूर्म#कृकल
दस वायुशरीर की दस वायु कौन सी हैं?दस वायु हैं: प्राण, अपान, समान, उदान, व्यान, नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त और धनंजय।#दस वायु#प्राण#अपान
लोकसमुद्र मंथन में भगवान विष्णु कहाँ-कहाँ उपस्थित थे?विष्णु मार्गदर्शक, कूर्म, पर्वत-संरक्षक, गुणरूप और मोहिनी रूप में उपस्थित थे।#विष्णु सर्वव्यापकता#समुद्र मंथन#कूर्म
मंदिर वास्तुमंदिर में कछुए की मूर्ति क्यों रखी जाती है?कूर्म अवतार: विष्णु ने कछुआ बन मंदार पर्वत धारण किया (समुद्र मंथन)। गीता: कछुआ = इन्द्रिय संयम प्रतीक ('कूर्मोऽङ्गानीव')। दक्षिण भारत: ध्वज स्तम्भ/बलि पीठ के पास कूर्मासन। वास्तु: सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि। धैर्य-दीर्घायु का प्रतीक। मुख अंदर/गर्भगृह की ओर।#कूर्म#कछुआ#विष्णु अवतार