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विस्तृत उत्तर
ध्यान और समाधि में अंतर चित्त की स्थिति से समझाया गया है। ध्येय विषय में चित्त की एकाग्रता ध्यान है, और इस स्थिति में चित्त अन्य वृत्तियों से रहित हो जाता है। वही ध्यान जब चैतन्यस्वरूप ध्येयमात्र से प्रकाशित होकर देहशून्यता की स्थिति प्राप्त कर लेता है, तब वह समाधि है। पाठ में प्राणायाम को ध्यान और समाधि आदि का हेतु भी कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 45, श्लोक 43-44
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