विस्तृत उत्तर
रौद्री गायत्री को ज्ञानदायिनी और विद्यास्वरूपिणी इसलिए कहा गया है क्योंकि पाठ में उसका स्वरूप ही ज्ञान और विद्या से सम्बद्ध बताया गया है। ब्रह्मा ने एकाग्रचित्त होकर रौद्री गायत्री का ध्यान किया और रौद्री गायत्री रूप में कही गई धेनु का जप किया। वह धेनु वेदप्रतिपादित, ज्ञानदायिनी, विद्यास्वरूपिणी और लोकवन्द्या महादेवी कही गई है। उसी साधना के बाद महादेव ने ब्रह्मा को दिव्य योग, कीर्ति, ऐश्वर्य, ज्ञानसम्पदा और वैराग्य दिया।
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