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ध्यान अनुभव📜 शोध: अमर उजाला ('बिजली कौंधना'), पूर्व ID 716/7231 मिनट पठन

ध्यान करते समय शरीर में विद्युत प्रवाह जैसा अनुभव क्यों होता है?

संक्षिप्त उत्तर

प्राण ऊर्जा (72,000 नाड़ी), कुंडलिनी (अमर उजाला: 'बिजली कौंधना'), नाड़ी शुद्धि (block), चक्र सक्रिय। रीढ़=कुंडलिनी, हथेली=प्राण। सामान्य+शुभ! दर्दनाक=गुरु।

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विस्तृत उत्तर

विद्युत प्रवाह = प्राण/कुंडलिनी (अमर उजाला verified):

अमर उजाला: कुंडलिनी = 'बिजली कौंधने और मेघों के गरजने जैसी अनुभूति।'

कारण

  1. 1प्राण ऊर्जा: नाड़ियों में प्राण प्रवाह = विद्युत जैसा (72,000 नाड़ी)।
  2. 2कुंडलिनी: मूलाधार→ऊपर = रीढ़ में विद्युत = सबसे तीव्र।
  3. 3नाड़ी शुद्धि: block → ऊर्जा गुजरे = friction → विद्युत अनुभव।
  4. 4चक्र सक्रिय: विशिष्ट चक्र = विद्युत/गर्मी/ठंडक = ऊर्जा केंद्र।

स्थान अनुसार: रीढ़ = कुंडलिनी। हथेली = प्राण। शिर = सहस्रार। पूरा शरीर = नाड़ी शुद्धि।

सामान्य — शुभ! घबराएं नहीं। गहरी श्वास। बहने दें। अत्यधिक दर्दनाक = गुरु।

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शास्त्रीय स्रोत
शोध: अमर उजाला ('बिजली कौंधना'), पूर्व ID 716/723
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