विस्तृत उत्तर
विद्युत प्रवाह = प्राण/कुंडलिनी (अमर उजाला verified):
अमर उजाला: कुंडलिनी = 'बिजली कौंधने और मेघों के गरजने जैसी अनुभूति।'
कारण
- 1प्राण ऊर्जा: नाड़ियों में प्राण प्रवाह = विद्युत जैसा (72,000 नाड़ी)।
- 2कुंडलिनी: मूलाधार→ऊपर = रीढ़ में विद्युत = सबसे तीव्र।
- 3नाड़ी शुद्धि: block → ऊर्जा गुजरे = friction → विद्युत अनुभव।
- 4चक्र सक्रिय: विशिष्ट चक्र = विद्युत/गर्मी/ठंडक = ऊर्जा केंद्र।
स्थान अनुसार: रीढ़ = कुंडलिनी। हथेली = प्राण। शिर = सहस्रार। पूरा शरीर = नाड़ी शुद्धि।
सामान्य — शुभ! घबराएं नहीं। गहरी श्वास। बहने दें। अत्यधिक दर्दनाक = गुरु।




