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ध्यान अनुभव📜 योग शास्त्र, पतंजलि (3.38 — परशरीरावेश)1 मिनट पठन

ध्यान करते समय अपने शरीर से बाहर निकलने का अनुभव क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

'ऊपर से शरीर देखना' = शरीर transcend, सूक्ष्म शरीर, पतंजलि 3.38। कुंडलिनी→सहस्रार। Webdunia: 'अनुभव — मन खेल भी।' भय नहीं — 'वापस आओगे।' गुरु।

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विस्तृत उत्तर

शरीर से बाहर (Out of Body — OBE) = उन्नत ध्यान:

अनुभव: 'मैं ऊपर से अपना शरीर देख रहा हूं।' शरीर = नीचे, चेतना = ऊपर/बाहर।

अर्थ

  1. 1शरीर transcend: 'मैं शरीर नहीं, आत्मा हूं' = अनुभव → आत्मज्ञान संकेत।
  2. 2सूक्ष्म शरीर: सूक्ष्म शरीर = स्थूल से अलग → OBE = सूक्ष्म शरीर यात्रा।
  3. 3पतंजलि (3.38): 'परशरीरावेशः' — बंधन शिथिल → चेतना स्वतंत्र।
  4. 4कुंडलिनी: ऊर्जा सहस्रार → चेतना शरीर पार।

Webdunia (पूर्व): 'हवा में ऊपर उठ जाना — ऐसा होता नहीं, अनुभव होता है। मन खेल भी संभव।'

सावधानी: भय न करें। 'वापस आ जाऊंगा' — हमेशा। गुरु मार्गदर्शन = आवश्यक।

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शास्त्रीय स्रोत
योग शास्त्र, पतंजलि (3.38 — परशरीरावेश)
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