का सरल उत्तर
'ऊपर से शरीर देखना' = शरीर transcend, सूक्ष्म शरीर, पतंजलि 3.38। कुंडलिनी→सहस्रार।: 'अनुभव — मन खेल भी।' भय नहीं — 'वापस आओगे।' गुरु।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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