विस्तृत उत्तर
सांस रुकना = केवली कुंभक — उन्नत + सामान्य:
पतंजलि (2.51): चौथा प्राणायाम = 'बाह्य+आभ्यंतर विषय से परे' = केवली कुंभक = श्वास स्वतः रुकना = सर्वोच्च।
हठ योग: केवली कुंभक = बिना प्रयास श्वास रुकना = ध्यान अत्यंत गहन = कुंडलिनी सक्रिय।
कारण
- 1मन शांत = श्वास शांत: मन-श्वास = connected। मन शून्य → श्वास = न्यूनतम/रुकी सी।
- 2ऊर्जा: प्राण = सुषुम्ना → श्वास = इड़ा-पिंगला → सुषुम्ना = श्वास ↓।
- 3समाधि संकेत: श्वास रुकना = समाधि निकट (हठ योग)।
सावधानी: वास्तव में रुकती नहीं — अत्यंत धीमी/सूक्ष्म। भय = तुरंत वापस। जबरदस्ती रोकना ≠ केवली (खतरनाक)।




