विस्तृत उत्तर
ॐ ध्वनि स्वतः = अनाहत नाद — सर्वशुभ:
अर्थ
- 1अनाहत नाद: 'अनाहत' = 'बिना आघात' — बिना किसी वाद्य/स्रोत = ध्वनि। ॐ = ब्रह्मांडीय मूल ध्वनि।
- 2नाद योग: हठ योग प्रदीपिका: 'नाद सुनना = ध्यान सर्वोत्तम विधि।' ॐ = सर्वप्रथम नाद।
- 3सहस्रार निकट: ॐ = सहस्रार ध्वनि → सुनना = उच्चतम ध्यान।
- 4ब्रह्म: 'ॐ इति ब्रह्म' (गीता) — ॐ सुनना = ब्रह्म स्पर्श।
10 नाद (हठ योग): चिनी (टिड्डी), भेरी (ढोल), शंख, घंटा, वीणा, बांसुरी, ढक्का, मेघ, ॐ → अंतिम = ॐ = सर्वोच्च।
क्या करें: अत्यंत शुभ! ध्वनि में डूबें — साक्षी। ध्यान जारी रखें।





