विस्तृत उत्तर
ध्यान में बिना बाह्य स्रोत के पुकार सुनाई देना = विशिष्ट ध्यान अनुभव।
सम्भावित अर्थ
1. अनाहत नाद: हठयोग प्रदीपिका: ध्यान गहरा होने पर आन्तरिक ध्वनियाँ — घंटा, शंख, वीणा, मानवीय आवाज। ऊर्जा जागृति संकेत।
2. इष्ट देवता पुकार: भक्ति परम्परा: देवता कृपा/निकटता। 'ॐ', नाम, या 'आओ' जैसी ध्वनि।
3. गुरु/पूर्वज सम्पर्क: सूक्ष्म स्तर पर — विशेषकर परिचित आवाज।
4. Hypnagogic state (वैज्ञानिक): जागरण-नींद सीमा = auditory experience सामान्य।
क्या करें: घबराएँ नहीं। शान्तिदायक = शुभ, जारी रखें। भयकारी = ध्यान समाप्त + 'ॐ' जपें। गुरु बताएँ। बार-बार/ध्यान बाहर भी = चिकित्सक।




