विस्तृत उत्तर
अनाहत संगीत = दिव्य — सर्वशुभ:
अनुभव
- ▸हृदय क्षेत्र → बिना बाहरी स्रोत → मधुर संगीत — वीणा/बांसुरी/घंटी/ॐ।
- ▸'कान से नहीं — हृदय से सुन रहा' = अनाहत नाद।
- ▸DhyanSamadhi (पूर्व): 'अनाहत = बहुत सारी सिद्धियां, ब्रह्मांडीय ऊर्जा, आनंद।'
अर्थ
- 1अनाहत चक्र जागृत: 12 दल कमल = खुला → दिव्य संगीत।
- 2प्रेम/करुणा: हृदय शुद्ध → प्रेम → संगीत = प्रेम की ध्वनि।
- 3AWGP (पूर्व): 'अनाहत भेदन = वासनाओं से मुक्त।'
- 4कृष्ण बांसुरी: बांसुरी = कृष्ण → हृदय में कृष्ण = बांसुरी (ID 750)।
हठ योग (10 नाद): अनाहत = मध्य चक्र → मध्य नाद (वीणा/बांसुरी = 5-6वां)।
क्या करें: ध्वनि में डूबें! सबसे सुंदर ध्यान अनुभवों में से एक। जारी रखें → ॐ ओर।




