ध्यान अनुभवध्यान करते समय अपने शरीर से बाहर निकलने का अनुभव क्या है?'ऊपर से शरीर देखना' = शरीर transcend, सूक्ष्म शरीर, पतंजलि 3.38। कुंडलिनी→सहस्रार।: 'अनुभव — मन खेल भी।' भय नहीं — 'वापस आओगे।' गुरु।#शरीर#बाहर#निकलना
षोडश संस्कारनिष्क्रमण संस्कार कब करना चाहिएनिष्क्रमण = शिशु को पहली बार बाहर ले जाने का संस्कार। कब: जन्म के चौथे मास में, शुभ तिथि। विधि: स्नान-नए वस्त्र → सूर्य दर्शन ('तच्चक्षुर्देवहितम्') → मन्दिर दर्शन → गुरुजनों से आशीर्वाद। चौथा मास = शिशु कुछ सबल। तेज और शीतलता प्राप्ति हेतु।#निष्क्रमण
मंदिर ज्ञानमंदिर से बाहर निकलते समय घंटी बजानी चाहिए या नहीं?वर्जित। श्लोक: 'गमनार्थं तु राक्षसाम्' — बाहर जाते घंटी = राक्षस गमन। प्रवेश = आवाहन। बाहर = मौन विदाई। 2-3 बार पर्याप्त।#बाहर#निकलते#घंटी
मंत्र जप नियममंत्र अनुष्ठान के दौरान घर से बाहर जा सकते हैं या नहीं?कठोर: 40 दिन घर (कुछ)। व्यावहारिक: कार्यालय = हां (जीविका=धर्म), मंदिर = हां, बाजार/मनोरंजन = बचें। बाहर = सात्विक+ब्रह्मचर्य+मानस जप जारी। 'संसार में साधना।'#अनुष्ठान#बाहर#घर