विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा ने प्रजा-सृष्टि के लिए पहले गहरी चिंता और विचार किया। जब एक हजार दिव्य वर्षों तक सर्वत्र जल ही जल रहा, तब ब्रह्मा अत्यन्त दुःखित हुए और प्रजासृष्टि की इच्छा से विचारमग्न हो गये। इसके बाद वे पुत्र की कामना से ध्यान करने लगे। उसी चिंतन और ध्यान की स्थिति में उनका वर्ण काला हो गया। आगे इसी प्रसंग में उन्होंने कृष्णवर्ण तेजस्वी कुमार को देखा और उसे अघोरसंज्ञक महादेव जाना।
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