विस्तृत उत्तर
भगवान शिव के पांच मुखों का वर्णन तैत्तिरीय आरण्यक और शैव आगम में विस्तार से है:
पांच मुख — नाम, दिशा और मंत्र
| मुख | दिशा | वर्ण | शक्ति | मंत्र |
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| सद्योजात | पश्चिम | श्वेत | सृजन (ब्रह्मा तत्त्व) | 'ॐ सद्योजातं प्रपद्यामि...' |
| वामदेव | उत्तर | रक्त/लाल | पालन (विष्णु तत्त्व) | 'ॐ वामदेवाय नमो...' |
| अघोर | दक्षिण | कृष्ण/नीला | संहार (रुद्र तत्त्व) | 'ॐ अघोरेभ्यो...' |
| तत्पुरुष | पूर्व | पीत | तिरोधान (गुप्त शक्ति) | 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे...' |
| ईशान | ऊर्ध्व (ऊपर/आकाश) | स्फटिक/श्वेत | अनुग्रह (मोक्ष शक्ति) | 'ॐ ईशानः सर्वविद्यानाम्...' |
तैत्तिरीय आरण्यक में
ये पांच मंत्र 'पंचब्रह्म मंत्र' कहलाते हैं और शिव के पांच मुखों से सम्बद्ध हैं।
पांच शक्तियां
शैव सिद्धांत के अनुसार शिव की पांच मूल क्रियाएं:
- 1सृष्टि (रचना) — सद्योजात
- 2स्थिति (पालन) — वामदेव
- 3संहार (विनाश) — अघोर
- 4तिरोधान (गुप्त करना) — तत्पुरुष
- 5अनुग्रह (कृपा/मोक्ष) — ईशान
पंचमुखी पूजा
इन पांचों मंत्रों से अलग-अलग अभिषेक किया जाता है — पांच भिन्न द्रव्य, पांच भिन्न रंग के फूल।





