पंचमुखी हनुमान मंत्र
भगवान हनुमान के पंचमुखी स्वरूप की उपासना विशेष फलदायी मानी गई है । यह स्वरूप पांच दिशाओं – पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, उत्तर और ऊर्ध्व – का प्रतिनिधित्व करता है और विभिन्न प्रकार की शक्तियों से युक्त है। प्रत्येक मुख का अपना विशिष्ट मंत्र और उद्देश्य है।
स्रोत एवं दुर्लभता: यह मंत्र विशेष रूप से शत्रु संकट निवारण और विजय प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। कुछ संदर्भ इसे एक दुर्लभ और शक्तिशाली मंत्र के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
साधना विधि: इस मंत्र का जाप पंचमुखी हनुमान जी के मंदिर या उनके चित्र के समक्ष करने का विधान है, विशेषकर हनुमान जयंती पर। जाप के साथ गुग्गुल की धूप देने का भी निर्देश है। यदि संकट गंभीर हो या शत्रु अधिक पीड़ा दे रहे हों, तो हनुमान जयंती से आरंभ करके आठ दिनों तक प्रतिदिन 27,000 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए। आठवें दिन रात्रि में सरसों के तेल से इसी मंत्र द्वारा 270 आहुतियों का हवन करने का विधान है।
लाभ: इस साधना से शत्रु पीड़ा का शमन होता है और साधक को विजयश्री की प्राप्ति होती है।
स्रोत एवं साधना: यह मंत्र विशेष रूप से प्रेत बाधाओं और सभी प्रकार के भय से मुक्ति दिलाने वाला अचूक मंत्र माना गया है। इसका प्रतिदिन 108 बार जाप करने का विधान है।
लाभ: इस मंत्र के प्रभाव से सभी प्रकार के भय, भूत-प्रेत बाधाओं का नाश होता है। 'सकलभीतप्रेतदमनाय' शब्द का अर्थ ही है सभी प्रकार के भय और प्रेतों का दमन करने वाला।
अन्य सम्बंधित पंचमुखी मंत्र एवं उनकी विवेचना:
श्री हनुमान कवच के अंतर्गत पंचमुखी हनुमान के प्रत्येक मुख से संबंधित विशिष्ट मंत्रों का उल्लेख मिलता है। पूर्व दिशा के कपिमुख का मंत्र (ऊपर वर्णित) सकल शत्रु संहारक है। दक्षिण दिशा के नरसिंह मुख का मंत्र (ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय दक्षिणमुखाय करालवदनाय नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाहा) सकल भूत-प्रेतों का नाश करने वाला है। पश्चिम दिशा के गरुड़ मुख का मंत्र (ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पश्चिममुखाय गरुडाननाय सकलविषहराय स्वाहा) सभी प्रकार के विषों का हरण करने वाला है। उत्तर दिशा के आदिवराह मुख का मंत्र (ॐ नमो भगवते पंचवदनाय उत्तरमुखाय आदिवराहाय सकलसंपत्कराय स्वाहा) सकल सम्पदाएं प्रदान करने वाला है। तथा ऊर्ध्व दिशा के हयग्रीव मुख का मंत्र (ॐ नमो भगवते पंचवदनाय ऊर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय सकलजनवशकराय स्वाहा) सकल जनों को वश में करने वाला है।
पंचमुखी हनुमान का प्रतीकात्मक महत्व अत्यंत गहन है। उनके पांच मुख विभिन्न दिशाओं की रक्षा करने के साथ-साथ विभिन्न शक्तियों (जैसे शत्रु नाश, बाधा निवारण, विष हरण, ऐश्वर्य प्राप्ति और वशीकरण) का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। यह हनुमान जी की उपासना की व्यापकता और साधक को चतुर्दिक सुरक्षा प्रदान करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। प्रत्येक मुख का एक विशिष्ट मंत्र और उससे संबंधित फलश्रुति, हनुमान उपासना की गहनता और विविधता को उजागर करती है। यद्यपि पंचमुखी हनुमान का स्वरूप भक्तों में सुपरिचित है, तथापि प्रत्येक मुख के विशिष्ट मंत्र और उनकी गूढ़ साधना विधियां सामान्यतः अल्पज्ञात हैं। इन मंत्रों में प्रयुक्त 'टं टं टं टं टं' जैसे बीजाक्षर और 'फट् स्वाहा' जैसे तांत्रिक शब्द इनकी तांत्रिक प्रकृति और प्रचंड शक्ति की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं, जो इन्हें विशेष रूप से शक्तिशाली और गोपनीय बनाते हैं।
