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पंचमुखी हनुमान कवच मंत्र:शत्रु नाश और अचूक रक्षा की तांत्रिक विधि!
हनुमान

पंचमुखी हनुमान कवच मंत्र:शत्रु नाश और अचूक रक्षा

📿 पौराणिक•3 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 26 मई 2025
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एक ही मंत्र से हो सकता है शत्रु विनाश, प्रेत बाधा का अंत और अपार शक्ति की प्राप्ति — जानिए पंचमुखी हनुमान जी के रहस्यमय मंत्रों का चमत्कारी प्रभाव!

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पंचमुखी हनुमान मंत्र

पंचमुखी हनुमान मंत्र

भगवान हनुमान के पंचमुखी स्वरूप की उपासना विशेष फलदायी मानी गई है । यह स्वरूप पांच दिशाओं – पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, उत्तर और ऊर्ध्व – का प्रतिनिधित्व करता है और विभिन्न प्रकार की शक्तियों से युक्त है। प्रत्येक मुख का अपना विशिष्ट मंत्र और उद्देश्य है।

"ॐ पूर्वकपिमुखाय पंचमुख हनुमते टं टं टं टं टं सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा॥"

स्रोत एवं दुर्लभता: यह मंत्र विशेष रूप से शत्रु संकट निवारण और विजय प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। कुछ संदर्भ इसे एक दुर्लभ और शक्तिशाली मंत्र के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

साधना विधि: इस मंत्र का जाप पंचमुखी हनुमान जी के मंदिर या उनके चित्र के समक्ष करने का विधान है, विशेषकर हनुमान जयंती पर। जाप के साथ गुग्गुल की धूप देने का भी निर्देश है। यदि संकट गंभीर हो या शत्रु अधिक पीड़ा दे रहे हों, तो हनुमान जयंती से आरंभ करके आठ दिनों तक प्रतिदिन 27,000 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए। आठवें दिन रात्रि में सरसों के तेल से इसी मंत्र द्वारा 270 आहुतियों का हवन करने का विधान है।

लाभ: इस साधना से शत्रु पीड़ा का शमन होता है और साधक को विजयश्री की प्राप्ति होती है।

"ॐ दक्षिणामुखाय पच्चमुख हनुमते करालवदनाय नारसिंहाय ॐ हां हीं हूं हौं हः सकलभीतप्रेतदमनाय स्वाहाः"

स्रोत एवं साधना: यह मंत्र विशेष रूप से प्रेत बाधाओं और सभी प्रकार के भय से मुक्ति दिलाने वाला अचूक मंत्र माना गया है। इसका प्रतिदिन 108 बार जाप करने का विधान है।

लाभ: इस मंत्र के प्रभाव से सभी प्रकार के भय, भूत-प्रेत बाधाओं का नाश होता है। 'सकलभीतप्रेतदमनाय' शब्द का अर्थ ही है सभी प्रकार के भय और प्रेतों का दमन करने वाला।

अन्य सम्बंधित पंचमुखी मंत्र एवं उनकी विवेचना:

श्री हनुमान कवच के अंतर्गत पंचमुखी हनुमान के प्रत्येक मुख से संबंधित विशिष्ट मंत्रों का उल्लेख मिलता है। पूर्व दिशा के कपिमुख का मंत्र (ऊपर वर्णित) सकल शत्रु संहारक है। दक्षिण दिशा के नरसिंह मुख का मंत्र (ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय दक्षिणमुखाय करालवदनाय नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाहा) सकल भूत-प्रेतों का नाश करने वाला है। पश्चिम दिशा के गरुड़ मुख का मंत्र (ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पश्चिममुखाय गरुडाननाय सकलविषहराय स्वाहा) सभी प्रकार के विषों का हरण करने वाला है। उत्तर दिशा के आदिवराह मुख का मंत्र (ॐ नमो भगवते पंचवदनाय उत्तरमुखाय आदिवराहाय सकलसंपत्कराय स्वाहा) सकल सम्पदाएं प्रदान करने वाला है। तथा ऊर्ध्व दिशा के हयग्रीव मुख का मंत्र (ॐ नमो भगवते पंचवदनाय ऊर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय सकलजनवशकराय स्वाहा) सकल जनों को वश में करने वाला है।

पंचमुखी हनुमान का प्रतीकात्मक महत्व अत्यंत गहन है। उनके पांच मुख विभिन्न दिशाओं की रक्षा करने के साथ-साथ विभिन्न शक्तियों (जैसे शत्रु नाश, बाधा निवारण, विष हरण, ऐश्वर्य प्राप्ति और वशीकरण) का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। यह हनुमान जी की उपासना की व्यापकता और साधक को चतुर्दिक सुरक्षा प्रदान करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। प्रत्येक मुख का एक विशिष्ट मंत्र और उससे संबंधित फलश्रुति, हनुमान उपासना की गहनता और विविधता को उजागर करती है। यद्यपि पंचमुखी हनुमान का स्वरूप भक्तों में सुपरिचित है, तथापि प्रत्येक मुख के विशिष्ट मंत्र और उनकी गूढ़ साधना विधियां सामान्यतः अल्पज्ञात हैं। इन मंत्रों में प्रयुक्त 'टं टं टं टं टं' जैसे बीजाक्षर और 'फट् स्वाहा' जैसे तांत्रिक शब्द इनकी तांत्रिक प्रकृति और प्रचंड शक्ति की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं, जो इन्हें विशेष रूप से शक्तिशाली और गोपनीय बनाते हैं।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

साधना विधि

हनुमान साधना कैसे करें?

मंगलवार को ब्रह्ममुहूर्त में लाल आसन पर बैठकर, चमेली का दीप जलाएं, सिंदूर चढ़ाएं, 'ॐ हं हनुमते नमः' का 108 बार जप करें। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ सर्वोत्तम साधना है। 21 मंगलवार की साधना से विशेष फल मिलता है।

हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा रोज पढ़ने से क्या होता है?

हनुमान चालीसा के नित्य पाठ से — रोग और पीड़ा नष्ट होती है, भूत-प्रेत दूर रहते हैं, शनि पीड़ा कम होती है, मानसिक बल और साहस बढ़ता है, और राम जी की कृपा प्राप्त होती है। मंगलवार-शनिवार को 3 या 7 बार पाठ विशेष फलदायी है।

मंत्र सिद्धि

हनुमान मंत्र सिद्धि कैसे करें?

मुख्य मंत्र: 'ॐ हं हनुमते नमः' (5 अक्षर = 5 लाख पुरश्चरण)। मंगलवार-शनिवार, हनुमान जयंती। 41 दिन का अनुष्ठान प्रचलित। केसरिया वस्त्र, मूंगा/रुद्राक्ष माला। भोग: सिन्दूर, लड्डू। हनुमान चालीसा 108 बार = मंत्र-जप तुल्य। कलियुग में सर्वाधिक जाग्रत देवता।

भक्ति उपाय

हनुमान जी को प्रसन्न कैसे करें?

हनुमान जी को प्रसन्न करने के उपाय: हनुमान चालीसा पाठ, राम नाम जप, सिंदूर अर्पण, चमेली के तेल का दीप, गुड़-चना का भोग और मंगलवार-शनिवार को सुंदरकांड पाठ करें। ब्रह्मचर्य, सत्य और सेवा भाव से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

हनुमान

हनुमान चालीसा का पाठ रात में करना चाहिए या नहीं?

हां — कभी भी। प्रातः सर्वोत्तम, रात मान्य (भय/संकट विशेष)। 'भूत पिशाच निकट नहिं आवै' — रात = रक्षा। कोई वर्जित नहीं। हनुमान = सदा जागृत, सबसे सुलभ।

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