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विस्तृत उत्तर
त्रिगुणात्मक चिंतन का मतलब सत्त्व, रज और तमोगुण से युक्त चिंतन है। पाठ में कहा गया है कि मुख्य सर्ग के बाद ध्यानपूर्वक मनन करते हुए ब्रह्माजी का कण्ठ, अर्थात् उनका चिन्तन, त्रिगुणात्मक हो गया। यहाँ त्रिगुणात्मक शब्द को स्पष्ट करते हुए सत्त्व, रज और तमोगुण से युक्त बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 5, PDF पृष्ठ 29, श्लोक 3-4
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