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विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा की पहली सृष्टि अविद्या से ग्रस्त कही गई है, क्योंकि उन्होंने सम्यक विचार किये बिना सृष्टि-रचना का विचार किया और उसी समय मोह ने उन्हें व्याप्त कर लिया। उस अवस्था में पंचपर्वा अविद्या उत्पन्न हुई। ब्रह्माजी ने इस प्रथम सर्ग को सृष्टि-विस्तार के लिये असाधक माना और फिर वृक्षादिरूप मुख्य सर्ग की रचना की।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 5, PDF पृष्ठ 29, श्लोक 1-4
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