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पूर्वभाग अध्याय 5 से जुड़े सभी प्रश्न(51)

पूर्वभाग अध्याय 5 पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 51 प्रश्न उपलब्ध हैं।

ऋषि संतति

स्वाहा और अग्नि से कितने पुत्र हुए?

स्वाहा और अग्नि से तीन पुत्र उत्पन्न हुए, जिन्हें तीनों लोकों के कल्याण के लिये कहा गया है।

#स्वाहा#अग्नि#तीन पुत्र
ऋषि संतति

ऊर्जा और वसिष्ठ की संतान कौन थीं?

ऊर्जा और वसिष्ठ से रज, सुहोत्र, बाहु, सवन, अनघ, सुतपा और शुक्र नामक सात पुत्र उत्पन्न हुए।

#ऊर्जा#वसिष्ठ#रज
ऋषि संतति

अनसूया और अत्रि की संतान कौन थीं?

अनसूया और अत्रि से श्रुति तथा सत्यनेत्र, मुनिर्भव्य, मूर्तिराप, शनैश्चर और सोम उत्पन्न हुए।

#अनसूया#अत्रि#श्रुति
ऋषि संतति

स्मृति और अंगिरा की संतान कौन थीं?

स्मृति और अंगिरा से सिनीवाली, कुहू, राका, अनुमति और अग्नि उत्पन्न हुए।

#स्मृति#अंगिरा#सिनीवाली
ऋषि संतति

सन्नति और क्रतु के बालखिल्य पुत्र कौन थे?

सन्नति और क्रतु के साठ हजार पुत्र हुए, जो बालखिल्य नाम से प्रसिद्ध बताए गए हैं।

#सन्नति#क्रतु#बालखिल्य
ऋषि संतति

प्रीति और पुलस्त्य की संतान कौन थीं?

प्रीति और पुलस्त्य से दत्तोर्ण, वेदबाहु और दृषद्वती उत्पन्न हुए।

#प्रीति#पुलस्त्य#दत्तोर्ण
ऋषि संतति

क्षमा और पुलह की संतान कौन थीं?

क्षमा और पुलह से कर्दम, वरीयांस, सहिष्णु और पीवरी उत्पन्न हुए।

#क्षमा#पुलह#कर्दम
ऋषि संतति

सम्भूति और मरीचि की संतान कौन थीं?

सम्भूति और मरीचि से पूर्णमास, मारीच, तुष्टि, दृष्टि, कृषि और अपचिति उत्पन्न हुए।

#सम्भूति#मरीचि#पूर्णमास
ऋषि संतति

ख्याति और भृगु की संतान कौन थीं?

ख्याति और भृगु से श्री यानी लक्ष्मी, धाता और विधाता उत्पन्न हुए।

#ख्याति#भृगु#श्री
धर्म वंश

धर्म की तेरह पत्नियों से कौन-कौन संतान हुई?

धर्म की तेरह पत्नियों से काम, दर्प, नियम, सन्तोष, लोभ, श्रुत, दण्ड, समय, बोध, अप्रमाद, विनय, व्यवसाय, क्षेम, सुख और यश उत्पन्न हुए।

#धर्म#धर्म की संतान#दण्ड
सती और रुद्र

पुत्री को पुन्नामक नरक से रक्षा करने वाली क्यों कहा गया?

ब्रह्मा ने दक्ष से सती की सेवा करने को कहा और पाठ में पुत्री को पुन्नामक नरक से रक्षा करने वाली बताया गया।

#पुत्री#पुन्नामक नरक#सती
सती और रुद्र

ग्यारह रुद्र किसके अंश से उत्पन्न हुए?

ग्यारह प्रकार के रुद्र शिव के अंश से उत्पन्न बताए गए हैं।

#ग्यारह रुद्र#शिव#नीललोहित
सती और रुद्र

स्त्रीजाति की उत्पत्ति सती से कैसे बताई गई है?

सती के अंश से तीनों लोकों की स्त्रियों की उत्पत्ति कही गई है।

#स्त्रीजाति#सती#शिव
सती और रुद्र

अर्धनारीश्वर से स्त्री-पुरुष विभाग कैसे हुआ?

ब्रह्मा ने सृष्टि के आरम्भ में शिव को अर्धनारीश्वर देखकर स्त्री-पुरुष विभाग करने को कहा, तब शिव की देह से सती अलग हुईं।

#अर्धनारीश्वर#शिव#सती
सती और रुद्र

सती का विवाह किससे हुआ?

सती ने भगवान् रुद्र को पति रूप में प्राप्त किया और दक्ष ने उन्हें आदरपूर्वक रुद्र को सौंप दिया।

#सती#रुद्र#दक्षप्रजापति
सती और रुद्र

सती दक्ष की पुत्री कैसे बनीं?

सती शिवसम्भवा मानसी पुत्री थीं; ब्रह्मा ने दक्ष से कहा कि अबसे यह सती तुम्हारी पुत्री होगी।

#सती#दक्ष#शिवसम्भवा
दक्ष वंश

स्वाहा और स्वधा का विवाह किससे हुआ?

स्वाहादेवी को भगवान् अग्नि ने और स्वधादेवी को पितरों ने पत्नी रूप में स्वीकार किया।

#स्वाहा#स्वधा#अग्नि
दक्ष वंश

अनसूया का विवाह किससे हुआ?

अनसूया का विवाह अत्रि से हुआ; उनसे एक कन्या श्रुति और पाँच आत्रेय पुत्र बताए गए हैं।

#अनसूया#अत्रि#आत्रेय
दक्ष वंश

सम्भूति, स्मृति, प्रीति, क्षमा और सन्नति का विवाह किससे हुआ?

सम्भूति का विवाह मरीचि से, स्मृति का अंगिरा से, प्रीति का पुलस्त्य से, क्षमा का पुलह से और सन्नति का क्रतु से हुआ।

#सम्भूति#स्मृति#प्रीति
दक्ष वंश

ख्याति का विवाह किससे हुआ?

ख्याति का विवाह बुद्धिसम्पन्न भृगु से हुआ; उनसे श्री, धाता और विधाता की उत्पत्ति बताई गई है।

#ख्याति#भृगु#लक्ष्मी
दक्ष वंश

धर्म की पत्नियाँ कौन थीं?

श्रद्धा से लेकर कीर्ति तक तेरह कन्याएँ प्रजापति धर्म की पत्नियाँ बनीं।

#धर्म#धर्म की पत्नियाँ#श्रद्धा
दक्ष वंश

दक्ष की चौबीस कन्याओं के नाम क्या थे?

दक्ष की चौबीस कन्याओं में श्रद्धा, लक्ष्मी, धृति, पुष्टि, तुष्टि, मेधा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा, वपु, शान्ति, सिद्धि, कीर्ति, ख्याति, शान्ति, सम्भूति, स्मृति, प्रीति, क्षमा, सन्नति, अनसूया, ऊर्जा, स्वाहा और स्वधा बताई गई हैं।

#दक्ष की कन्याएँ#श्रद्धा#लक्ष्मी
दक्ष वंश

दक्ष और प्रसूति की कितनी कन्याएँ थीं?

दक्ष और प्रसूति की चौबीस तपोमयी कन्याएँ बताई गई हैं।

#दक्षप्रजापति#प्रसूति#चौबीस कन्याएँ
मनु और शतरूपा

आकूति से यज्ञ और दक्षिणा का जन्म कैसे हुआ?

आकूति ने दक्षिणा सहित यज्ञ नामक पुत्र को जन्म दिया और दक्षिणा ने बारह दिव्य कन्याएँ उत्पन्न कीं।

#आकूति#यज्ञ#दक्षिणा
मनु और शतरूपा

प्रसूति का विवाह किससे हुआ?

प्रसूति का विवाह दक्षप्रजापति से हुआ और उनसे दक्ष की चौबीस तपोमयी कन्याएँ उत्पन्न हुईं।

#प्रसूति#दक्षप्रजापति#दक्ष की कन्याएँ
मनु और शतरूपा

आकूति का विवाह किससे हुआ?

आकूति का विवाह रुचि नामक प्रजापति से हुआ। उनसे यज्ञ और दक्षिणा का वर्णन जुड़ा है।

#आकूति#रुचि प्रजापति#यज्ञ
मनु और शतरूपा

आकूति और प्रसूति कौन थीं?

आकूति और प्रसूति मनु-शतरूपा की कन्याएँ थीं; आकूति ज्येष्ठ और प्रसूति छोटी कही गई हैं।

#आकूति#प्रसूति#मनु पुत्री
मनु और शतरूपा

प्रियव्रत और उत्तानपाद कौन थे?

प्रियव्रत और उत्तानपाद स्वायम्भुव मनु और शतरूपा के पुत्र थे; प्रियव्रत ज्येष्ठ और उत्तानपाद कनिष्ठ बताए गए हैं।

#प्रियव्रत#उत्तानपाद#स्वायम्भुव मनु
मनु और शतरूपा

मनु और शतरूपा की संतान कौन थी?

मनु और शतरूपा की संतान प्रियव्रत, उत्तानपाद, आकूति और प्रसूति बताई गई है।

#मनु#शतरूपा#प्रियव्रत
मनु और शतरूपा

स्वायम्भुव मनु और शतरूपा कौन थे?

स्वायम्भुव मनु और रानी शतरूपा का सृजन ब्रह्मा ने किया; शतरूपा अयोनिजा और पुण्यशालिनी कही गई हैं।

#स्वायम्भुव मनु#शतरूपा#ब्रह्मा
ऋषि और मानस पुत्र

ऋभु और सनत्कुमार कौन थे?

ऋभु और सनत्कुमार ब्रह्मा के अग्रजन्मा दिव्य पुत्र थे, जिन्हें नैष्ठिक ब्रह्मचारी और ब्रह्मवादी कहा गया है।

#ऋभु#सनत्कुमार#नैष्ठिक ब्रह्मचारी
ऋषि और मानस पुत्र

ब्रह्मा की बारह संतान कौन कही गई हैं?

नौ मानस पुत्रों के साथ संकल्प, धर्म और अधर्म मिलकर ब्रह्मा की बारह संतान कही गई हैं।

#ब्रह्मा की संतान#बारह संतान#संकल्प
ऋषि और मानस पुत्र

मरीचि, भृगु, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, दक्ष, अत्रि और वसिष्ठ कौन थे?

ये ब्रह्मा की योगविद्या से उत्पन्न नौ ब्रह्मवादी ऋषि और मानस पुत्र थे।

#मरीचि#भृगु#अंगिरा
ऋषि और मानस पुत्र

ब्रह्मा के नौ मानस पुत्र कौन थे?

ब्रह्मा के नौ मानस पुत्र मरीचि, भृगु, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, दक्ष, अत्रि और वसिष्ठ थे।

#ब्रह्मा के मानस पुत्र#मरीचि#भृगु
ऋषि और मानस पुत्र

सनकादि मुनियों ने परमपद कैसे प्राप्त किया?

सनकादि मुनियों ने निष्काम कर्मयोग से परमपद प्राप्त किया।

#सनकादि#निष्काम कर्मयोग#परमपद
ऋषि और मानस पुत्र

सनक, सनन्दन और सनातन कौन थे?

सनक, सनन्दन और सनातन ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न श्रेष्ठ मुनि थे; सनत्कुमार का भी उल्लेख साथ आता है।

#सनक#सनन्दन#सनातन
सर्ग

कौमार सर्ग क्या है?

कौमार सर्ग नौवाँ सर्ग है, जिसे प्राकृत और वैकृत दोनों कहा गया है।

#कौमार सर्ग#सनक#सनन्दन
सर्ग

वैकृत सर्ग कौन से हैं?

मुख्य, तिर्यक्, देव, मनुष्य और अनुग्रह सर्ग पाँच वैकृत सर्ग बताए गए हैं।

#वैकृत सर्ग#मुख्य सर्ग#तिर्यक्स्रोत
सर्ग

प्राकृत सर्ग कौन से हैं?

प्रारम्भ के तीन सर्ग प्राकृत हैं: महत्तत्त्वादि, भौतिक और ऐन्द्रिय सर्ग।

#प्राकृत सर्ग#महत्तत्त्व#भौतिक सर्ग
सर्ग

नौ प्रकार की सृष्टि कौन-कौन सी हैं?

नौ सर्ग हैं: महत्तत्त्व, भौतिक, ऐन्द्रिय, मुख्य, तिर्यक्, देव, मनुष्य, अनुग्रह और कौमार सर्ग।

#नवविध सर्ग#प्राकृत सर्ग#वैकृत सर्ग
सर्ग

अनुग्रह सर्ग क्या है?

अनुग्रह सर्ग सत्त्व और तमप्रधान सर्ग बताया गया है और नौ सर्गों में आठवाँ है।

#अनुग्रह सर्ग#सत्त्व#तम
सर्ग

अर्वाक्स्रोत सृष्टि क्या है?

अर्वाक्स्रोत सृष्टि मनुष्य आदि की सृष्टि है और नौ सर्गों में सातवाँ सर्ग कही गई है।

#अर्वाक्स्रोत#मनुष्य#मानव सृष्टि
सर्ग

ऊर्ध्वस्रोत सृष्टि क्या है?

ऊर्ध्वस्रोत सृष्टि सात्त्विक रूप कही गई है और देवताओं की सृष्टि से जुड़ी है।

#ऊर्ध्वस्रोत#देवसर्ग#देवता
सर्ग

तिर्यक्स्रोत सृष्टि क्या है?

तिर्यक्स्रोत सृष्टि पशु आदि तिर्यक् योनिवाले जीवों की सृष्टि है।

#तिर्यक्स्रोत#पशु#पक्षी
सर्ग

त्रिगुणात्मक चिंतन का क्या मतलब है?

त्रिगुणात्मक चिंतन का अर्थ सत्त्व, रज और तमोगुण से युक्त चिंतन बताया गया है।

#त्रिगुणात्मक#सत्त्व#रज
सर्ग

वृक्षादि सृष्टि में क्या-क्या आता है?

वृक्षादि सृष्टि में वृक्ष, गुल्म, लता, वीरुध् और तृणरूप पाँच प्रकार का सर्ग आता है।

#वृक्षादि सृष्टि#वृक्ष#गुल्म
सर्ग

मुख्य सर्ग क्या है?

मुख्य सर्ग वृक्षादि सृष्टि है, जिसमें वृक्ष, गुल्म, लता, वीरुध् और तृणरूप सर्ग बताए गए हैं।

#मुख्य सर्ग#वृक्ष#गुल्म
अविद्या

ब्रह्मा की पहली सृष्टि अविद्या से ग्रस्त क्यों कही गई?

पहली सृष्टि अविद्या से ग्रस्त कही गई क्योंकि सृष्टि-विचार सम्यक विचार के बिना हुआ और ब्रह्मा को मोह ने व्याप्त कर लिया।

#ब्रह्मा#पहली सृष्टि#अविद्या
अविद्या

तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र का अर्थ क्या है?

तम का अर्थ अज्ञान, महामोह का अर्थ भोगेच्छा, तामिस्र का अर्थ क्रोध और अन्धतामिस्र का अर्थ अभिनिवेश बताया गया है।

#तम#मोह#महामोह
अविद्या

अविद्या के पांच प्रकार कौन से हैं?

अविद्या के पांच प्रकार तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र बताए गए हैं।

#अविद्या#तम#मोह
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