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विस्तृत उत्तर
कौमार सर्ग नौवाँ सर्ग बताया गया है। पाठ में कहा गया है कि प्रारम्भ के तीन सर्ग प्राकृत हैं, पाँच सर्ग वैकृत हैं और नौवाँ कौमार सर्ग प्राकृत तथा वैकृत दोनों है। इसके बाद ब्रह्मा द्वारा सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार मुनियों की उत्पत्ति का वर्णन आता है, जिन्हें श्रेष्ठ मुनि कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 5, PDF पृष्ठ 29, श्लोक 8-9
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