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विस्तृत उत्तर
स्वाहा और अग्नि से तीन पुत्र हुए। पाठ में भगवान् अग्नि को परम अभिमानी, रुद्ररूप, ब्रह्मा के पुत्र और प्रजाओं के प्राणस्वरूप कहा गया है। उन्हीं अग्नि से स्वाहादेवी ने तीनों लोकों के कल्याण के लिये तीन पुत्र उत्पन्न किये। यहाँ उन तीन पुत्रों के नाम नहीं दिए गए, केवल उनकी संख्या और कल्याणार्थ उत्पत्ति बताई गई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 5, PDF पृष्ठ 33, श्लोक 50
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