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स्वाहा प्रश्नोत्तरी — 16 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित स्वाहा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 16 प्रश्न

हवन/यज्ञ

हवन में स्वाहा बोलने का क्या अर्थ है?

'सु+आहा'='अच्छी तरह अर्पित।' अग्नि=देवमुख, स्वाहा=अग्नि पत्नी (पुराण)। 'हे अग्नि, देवता तक पहुंचाओ!' 'इदं न मम'='मेरा नहीं'=समर्पण। बिना स्वाहा=अधूरी।

स्वाहाअर्थबोलना
अग्नि वंश

49 अग्नियाँ क्या हैं?

पुत्रों और पौत्रों को मिलाकर, आदिम सप्तक को छोड़कर कुल उनचास अग्नियाँ कही गई हैं।

49 अग्नियाँअग्नियज्ञ
अग्नि वंश

स्वाहा के पुत्र कौन-कौन हैं?

स्वाहा के पुत्र पवमान, पावक और शुचि बताए गए हैं।

स्वाहाअग्निपवमान
अग्नि वंश

शुचि कैसे उत्पन्न हुए?

शुचि का आविर्भाव सूर्य-प्रभा से बताया गया है।

शुचिसूर्य प्रभाअग्नि
अग्नि वंश

पावक कैसे उत्पन्न हुए?

पावक का आविर्भाव विद्युत् से बताया गया है।

पावकविद्युत्अग्नि
अग्नि वंश

पवमान कैसे उत्पन्न हुए?

पवमान का आविर्भाव अरणी आदि में घर्षण से बताया गया है।

पवमानअरणीघर्षण
अग्नि वंश

अग्नि के तीन पुत्र कौन हैं?

अग्नि के तीन पुत्र पवमान, पावक और शुचि बताए गए हैं। ये तीनों स्वाहा के पुत्र हैं।

अग्निस्वाहापवमान
ऋषि संतति

स्वाहा और अग्नि से कितने पुत्र हुए?

स्वाहा और अग्नि से तीन पुत्र उत्पन्न हुए, जिन्हें तीनों लोकों के कल्याण के लिये कहा गया है।

स्वाहाअग्नितीन पुत्र
दक्ष वंश

स्वाहा और स्वधा का विवाह किससे हुआ?

स्वाहादेवी को भगवान् अग्नि ने और स्वधादेवी को पितरों ने पत्नी रूप में स्वीकार किया।

स्वाहास्वधाअग्नि
दक्ष वंश

दक्ष की चौबीस कन्याओं के नाम क्या थे?

दक्ष की चौबीस कन्याओं में श्रद्धा, लक्ष्मी, धृति, पुष्टि, तुष्टि, मेधा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा, वपु, शान्ति, सिद्धि, कीर्ति, ख्याति, शान्ति, सम्भूति, स्मृति, प्रीति, क्षमा, सन्नति, अनसूया, ऊर्जा, स्वाहा और स्वधा बताई गई हैं।

दक्ष की कन्याएँश्रद्धालक्ष्मी
लोक

नान्दीमुख श्राद्ध में स्वधा के स्थान पर स्वाहा क्यों आता है?

नान्दीमुख श्राद्ध में पितर देवतुल्य माने जाते हैं, इसलिए स्वधा के स्थान पर स्वाहा या सम्पन्नम् का प्रयोग होता है।

नान्दीमुख श्राद्धस्वाहास्वधा
स्वाहा

अग्निदेव और स्वाहा के पुत्र कौन हैं?

अग्निदेव और स्वाहा के तीन पुत्र: पावक, पवमान और शुचि — ये यज्ञीय अग्नि के ही विभिन्न स्वरूप हैं।

अग्निदेव पुत्रपावक पवमान शुचियज्ञीय अग्नि
हवन विधान

हवन में 'स्वाहा' का क्या अर्थ है?

'स्वाहा' का अर्थ है पूर्ण समर्पण और भस्म कर देना — अग्निदेव आहुति को सूक्ष्म रूप में ग्रहण करके इष्ट देव तक पहुंचाते हैं। हवन मंत्र के अंत में 'स्वाहा' कहकर आहुति दी जाती है।

स्वाहापूर्ण समर्पणअग्निदेव
त्रिपुर भैरवी मंत्र

त्रिपुर भैरवी का मूल मंत्र क्या है?

त्रिपुर भैरवी का मूल मंत्र है: 'ह्नीं भैरवी क्लौं ह्नीं स्वाहा:' — यह शब्द-ब्रह्म की वह शक्ति है जो साधक के जीवन का रूपांतरण करती है।

मूल मंत्रह्नीं भैरवी क्लौंस्वाहा
आपदुद्धारण महामंत्र

बटुक भैरव मंत्र में स्वाहा क्यों जोड़ते हैं?

स्वाहा आहुति या समर्पण के लिए जोड़ा जाता है — प्रयोगों के भेद से मंत्र में स्वाहा जोड़कर 'ॐ ह्रीं बटुकाय... ह्रीं ॐ स्वाहा' रूप में जपा जाता है।

स्वाहाआहुतिसमर्पण
देवी-देवता परिचय

अग्नि देव की पत्नी का नाम क्या है?

अग्नि देव की पत्नी का नाम स्वाहा है, जो दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं। यज्ञ में 'स्वाहा' बोलने की परंपरा इन्हीं से जुड़ी है।

अग्नि देवस्वाहायज्ञ

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।