विस्तृत उत्तर
प्रयोगों के भेद से मंत्र में 'स्वाहा' (आहुति या समर्पण हेतु) अथवा अन्य बीज जोड़े जाते हैं।
स्वाहा जोड़ने पर मंत्र इस प्रकार होता है:
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
स्वाहा आहुति या समर्पण के लिए जोड़ा जाता है — प्रयोगों के भेद से मंत्र में स्वाहा जोड़कर 'ॐ ह्रीं बटुकाय... ह्रीं ॐ स्वाहा' रूप में जपा जाता है।
प्रयोगों के भेद से मंत्र में 'स्वाहा' (आहुति या समर्पण हेतु) अथवा अन्य बीज जोड़े जाते हैं।
स्वाहा जोड़ने पर मंत्र इस प्रकार होता है:
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ
पौराणिक पर आपको आपदुद्धारण महामंत्र से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।