विस्तृत उत्तर
तिल + घी = सर्वोत्तम आहुति।
तिल: पापनाश, पितृ तृप्ति ('तिलैस्तु पितरस्तृप्ताः'), शनि शान्ति (काले तिल), रोगाणुनाश (आयुर्वेद), सर्वकामना पूर्ति।
घी: अग्नि पोषण ('अग्नये स्वाहा'), देवता प्रसन्नता (सुगन्ध आकर्षण), वायु शुद्धि (कुछ शोध: ऑक्सीजन उत्पन्न), ऐश्वर्य (गाय घी = लक्ष्मी रूप)।
संयुक्त: पापनाश + ऐश्वर्य + रोगनाश + देवता प्रसन्नता = चतुर्विध फल। एक चम्मच घी + चुटकी तिल → 'स्वाहा'।

