विस्तृत उत्तर
हाँ, अत्यन्त शुभ।
शास्त्रीय: शिवपुराण: शिव स्वयं भस्मधारी। जाबालोपनिषद्: भस्म = पवित्रतम, पापनाश।
विधि: त्रिपुण्ड (3 क्षैतिज रेखा) — ललाट, बाहु, हृदय। 'ॐ नमः शिवाय' बोलकर। मध्यमा + अनामिका से। बिन्दु तिलक भी मान्य।
कौन सी: यज्ञ/हवन भस्म = सर्वोत्तम। गाय गोबर कण्डे भी मान्य।
लाभ: पापनाश, शिव कृपा, आज्ञा चक्र सक्रिय, शीतलता।
सावधानी: छानकर/बारीक करके, आँखों से दूर।





