विस्तृत उत्तर
जौ (यव) + तिल = शान्ति हवन का मूल मिश्रण।
जौ: बृहस्पति (गुरु) ग्रह, ज्ञान-धन-सौभाग्य, दरिद्रता नाश, वैदिक काल का प्रमुख अन्न। तिल: शनि ग्रह, पापनाश, पितृ तृप्ति।
संयुक्त: गुरु (जौ) + शनि (तिल) = ज्ञान + कर्म = सम्पूर्ण जीवन सुधार। शान्ति + समृद्धि + पापनाश + पितृ तृप्ति।
प्रयोग: नवग्रह शान्ति, पितृ/श्राद्ध हवन, वास्तु शान्ति, रोग शान्ति। समभाग + घी → 'स्वाहा'। सप्तधान्य में दोनों सम्मिलित।

