विस्तृत उत्तर
प्रत्येक आहुति को अग्नि में डालते समय 'स्वाहा' शब्द का उच्चारण अनिवार्य है। धर्मशास्त्रों और पुराणों के अनुसार, 'स्वाहा' के बिना कोई भी आहुति या हविष्य देवताओं तक नहीं पहुँचता, और वह यज्ञ निष्फल (फलहीन) माना जाता है।
स्वाहा के बिना अग्निदेव हविष्य को भस्म करने या उसे देवताओं तक प्रेषित करने में असमर्थ हैं।





