विस्तृत उत्तर
पुरश्चरण की समाप्ति पर दशांश हवन अनिवार्य है।
मंत्र पुरश्चरण के उपरांत दशांश हवन (यज्ञ) करने का विधान है। यह हवन असाध्य रोगों के निवारण के लिए विशेष रूप से कल्याणकर होता है।
असितांग भैरव पुरश्चरण के बाद दशांश हवन (यज्ञ) अनिवार्य है — यह असाध्य रोगों के निवारण के लिए विशेष रूप से कल्याणकर है।
पुरश्चरण की समाप्ति पर दशांश हवन अनिवार्य है।
मंत्र पुरश्चरण के उपरांत दशांश हवन (यज्ञ) करने का विधान है। यह हवन असाध्य रोगों के निवारण के लिए विशेष रूप से कल्याणकर होता है।
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