विस्तृत उत्तर
यज्ञ में आम की लकड़ी, घी, जड़ी-बूटियाँ, अनाज और अन्य सामग्री का दहन होता है। इस दहन से उत्पन्न राख (भस्म/विभूति) में विभिन्न खनिज तत्व उपस्थित होते हैं।
भस्म में पाए जाने वाले खनिज तत्व:
कैल्शियम (Calcium) — अनाज और लकड़ी के दहन से कैल्शियम ऑक्साइड और कैल्शियम कार्बोनेट उत्पन्न होता है। कैल्शियम हड्डियों और दाँतों के लिए आवश्यक है।
मैग्नीशियम (Magnesium) — जड़ी-बूटियों के दहन से मैग्नीशियम यौगिक।
पोटेशियम (Potassium) — लकड़ी की राख में पोटेशियम कार्बोनेट (K₂CO₃) होता है जो पारंपरिक रूप से खाद के रूप में प्रयोग होता है।
सिलिका (Silica) — विशेषतः अनाज जलाने पर।
फॉस्फोरस (Phosphorus) — जड़ी-बूटियों और अनाज से।
आयुर्वेद में भस्म — आयुर्वेद में विशेष विधि से धातुओं (स्वर्ण, रजत, लोह, ताँबा आदि) को जलाकर बनाई गई 'भस्म' औषधि के रूप में प्रयोग होती है। इन भस्मों में नैनो पार्टिकल्स होते हैं जो आधुनिक फार्माकोलॉजी के लिए रुचि का विषय हैं।
त्वचा पर प्रभाव — विभूति (शिव-भस्म) में कैल्शियम की उपस्थिति त्वचा को हल्का क्षारीय वातावरण देती है जो कुछ रोगाणुओं के विकास को रोकता है।
खाद के रूप में — यज्ञ की राख को खेत में डालने पर मिट्टी की क्षारीयता (pH) बढ़ती है और पोटेशियम-कैल्शियम का पोषण मिलता है।





