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भारतीय विज्ञान एवं गणित प्रश्नोत्तर — 12 प्रश्न

भारतीय विज्ञान एवं गणित से जुड़े 12 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 12 प्रश्न

यज्ञ की राख (भस्म) में क्या खनिज तत्व होते हैं?

यज्ञ की भस्म में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सिलिका और फॉस्फोरस होते हैं। आयुर्वेद में धातु-भस्म में नैनो पार्टिकल्स। यज्ञ राख खेत में खाद का काम करती है। शिव-भस्म (विभूति) में कैल्शियम त्वचा को क्षारीय वातावरण देता है।

यज्ञभस्मखनिज तत्व
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वैदिक गणित में शून्य की खोज कैसे हुई?

शून्य का विकास क्रमशः हुआ। वैदिक दर्शन में शून्यता की अवधारणा, आर्यभट्ट द्वारा दशमलव स्थानमान (498 ईस्वी), और ब्रह्मगुप्त द्वारा 'ब्रह्मस्फुटसिद्धांत' (628 ईस्वी) में शून्य की पूर्ण गणितीय परिभाषा — यह भारत की सबसे महान खोज है।

शून्यवैदिक गणितब्रह्मगुप्त
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सुश्रुत ने नाक की सर्जरी (राइनोप्लास्टी) कैसे की थी?

सुश्रुत ने नाक सर्जरी में: मदिरा से बेहोशी, पत्ते से घाव का माप, गाल की त्वचा का ग्राफ्ट, गर्म उपकरणों से स्टेरलाइजेशन, हल्दी-चंदन की ड्रेसिंग। 1793 में ब्रिटिश अधिकारी ने इस परंपरा की सफलता स्वयं देखी जिसने यूरोपीय प्लास्टिक सर्जरी को प्रेरित किया।

सुश्रुतराइनोप्लास्टीप्लास्टिक सर्जरी
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प्राचीन भारत में धातु विज्ञान (Metallurgy) कितना विकसित था?

दिल्ली का 1600 वर्ष पुराना जंग-रहित लौह स्तंभ भारतीय धातु विज्ञान का सबसे बड़ा प्रमाण। ऋग्वेद में लोहे का उल्लेख, वूट्ज़ इस्पात विश्व का सर्वश्रेष्ठ, हीरे की पहचान-व्यापार, स्वर्ण भस्म निर्माण — सब अत्यंत उन्नत था।

धातु विज्ञानलौह स्तंभवज्र
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यजुर्वेद में कृषि विज्ञान का उल्लेख कैसा है?

यजुर्वेद में ऋतुचक्र और वर्षा का महत्व, अथर्ववेद (3.17) में बीज बोने के मंत्र और फसल नाम, ऋग्वेद में हल और सीता (furrow) का उल्लेख। 'कृषि पाराशर' और 'वृक्षायुर्वेद' — कृषि के विशेष ग्रंथ।

यजुर्वेदकृषिखेती
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ऋग्वेद में गुरुत्वाकर्षण का उल्लेख है क्या?

ऋग्वेद में काव्यात्मक संकेत हैं। भास्कराचार्य (1150 ईस्वी) ने 'गुरुत्वाकर्षण' शब्द का स्पष्ट प्रयोग किया — न्यूटन से 500 वर्ष पहले। वराहमिहिर (6वीं सदी) ने भी पृथ्वी की आकर्षण शक्ति का उल्लेख किया। गणितीय सूत्र न्यूटन ने दिए।

ऋग्वेदगुरुत्वाकर्षणवैदिक विज्ञान
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आर्यभट्ट ने पृथ्वी गोल बताया था — इसका वैदिक और ऐतिहासिक प्रमाण क्या है?

आर्यभटीय (499 ईस्वी) के गोलपाद श्लोक 9 में नाव के उदाहरण से पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने का वैज्ञानिक प्रमाण। पृथ्वी का घूर्णनकाल और परिधि की गणना भी आश्चर्यजनक रूप से सटीक — कोपर्निकस से एक हजार वर्ष पहले।

आर्यभट्टपृथ्वी गोलआर्यभटीय
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अथर्ववेद में जल शुद्धिकरण का वर्णन कैसे है?

अथर्ववेद में जल को देवी स्वरूप और रोगनाशक माना। शुद्धि विधियाँ: उबालना, सूर्यप्रकाश, तुलसी, ताँबे का पात्र, कुश घास — इन सभी के पीछे आधुनिक विज्ञान ने एंटीमाइक्रोबियल गुण सिद्ध किए हैं।

अथर्ववेदजल शुद्धिवैदिक विज्ञान
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चरक ने मधुमेह (डायबिटीज) का इलाज कैसे बताया?

चरक संहिता में मधुमेह को 'प्रमेह' कहा। 20 प्रकार, मूत्र में मिठास से पहचान, वंशानुगत और जीवनशैली दोनों कारण बताए। उपचार: व्यायाम, करेला, मेथी, जामुन, गुड़मार, कम मीठा — आधुनिक चिकित्सा से आश्चर्यजनक समानता।

चरक संहितामधुमेहप्रमेह
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वैदिक काल में दंत चिकित्सा कैसे होती थी?

सुश्रुत संहिता में 65 मुखरोग, 8 प्रकार के दंतरोग। नीम-बबूल की दातून, गंडूष (oil pulling), दाँत निकालने की शल्य क्रिया, कृत्रिम दाँत का उल्लेख। नीम के एंटीबैक्टीरियल गुण आधुनिक विज्ञान ने सिद्ध किए हैं।

दंत चिकित्सासुश्रुत संहिताआयुर्वेद
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अग्निहोत्र से वायु शुद्धि का वैज्ञानिक प्रमाण क्या है?

कुछ शोधों में अग्निहोत्र के धुएँ में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए गए। गाय के घी में फैटी एसिड और चावल के दहन से विशेष यौगिक बनते हैं। वैज्ञानिक शोध अभी प्रारंभिक अवस्था में है — बड़े peer-reviewed प्रमाण अभी सीमित हैं।

अग्निहोत्रवायु शुद्धियज्ञ
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सामवेद में संगीत चिकित्सा का आधार क्या है?

सामवेद भारतीय संगीत का मूल ग्रंथ। नादब्रह्म — ध्वनि ईश्वर-स्वरूप। राग-रागिनी का समय और शरीर पर प्रभाव वैदिक ज्ञान है। आधुनिक Music Therapy के शोध — cortisol कम करना, डोपामिन बढ़ाना — वैदिक नादचिकित्सा से मेल खाते हैं।

सामवेदसंगीत चिकित्सानादचिकित्सा
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भारतीय विज्ञान एवं गणित — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर भारतीय विज्ञान एवं गणित श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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भारतीय विज्ञान एवं गणित को गहराई से समझने का तरीका

भारतीय विज्ञान एवं गणित प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

12 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।