विस्तृत उत्तर
अग्निहोत्र सूर्योदय और सूर्यास्त के समय किया जाने वाला एक वैदिक अनुष्ठान है जिसमें गाय के गोबर के उपलों से बनी अग्नि में गाय के घी और चावल की आहुति दी जाती है। इसका वैज्ञानिक अध्ययन कई शोधकर्ताओं ने किया है।
पोलैंड का शोध — पोलिश शोधकर्ता डॉ. हेन्ज़ आइसेन (Dr. Heinz Aisen) और उनकी टीम ने अग्निहोत्र के धुएँ का विश्लेषण किया और पाया कि यह वायु में मौजूद रोगजनक बैक्टीरिया (harmful bacteria) को नष्ट करता है।
भारत में भोपाल गैस त्रासदी — 1984 में भोपाल में यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैस से हजारों लोग मरे, किंतु एक परिवार जो नियमित अग्निहोत्र करता था, वह सुरक्षित रहा — यह कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं बल्कि एक व्यापक रूप से उद्धृत घटना है जिसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
घी का दहन — गाय के घी में ब्यूटेनोइक एसिड (butyric acid), फैटी एसिड और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। इनके दहन से फॉर्मलडिहाइड (formaldehyde) जैसे यौगिक बनते हैं जो कुछ रोगाणुओं को नष्ट कर सकते हैं।
चावल का दहन — चावल में एसिटीलीन (acetylene) होता है जो दहन पर एक विशेष प्रभाव उत्पन्न करता है।
सावधानी — अग्निहोत्र के वैज्ञानिक लाभों पर शोध अभी प्रारंभिक अवस्था में है। कुछ अध्ययनों में लाभ दिखे हैं, किंतु बड़े पैमाने पर peer-reviewed वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं। इसे आस्था और परंपरा के रूप में देखना तथा वैज्ञानिक दावों में संतुलन रखना उचित है।





