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विस्तृत उत्तर
अग्निहोत्र मंत्र — केवल 4:
सूर्योदय (2 मंत्र — 2 आहुति)
- 1'सूर्याय स्वाहा। सूर्याय इदं न मम।' → 1st आहुति।
- 2'प्रजापतये स्वाहा। प्रजापतये इदं न मम।' → 2nd आहुति।
सूर्यास्त (2 मंत्र — 2 आहुति)
- 1'अग्नये स्वाहा। अग्नये इदं न मम।' → 1st आहुति।
- 2'प्रजापतये स्वाहा। प्रजापतये इदं न मम।' → 2nd आहुति।
अर्थ: 'सूर्य/अग्नि/प्रजापति = ईश्वरवाचक शब्द। इदं न मम = यह मेरा नहीं = समर्पण।'
बस! 4 मंत्र = सम्पूर्ण अग्निहोत्र। सरलतम यज्ञ — कोई भी कर सकता है।
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