विस्तृत उत्तर
यज्ञ हिन्दू धर्म की सबसे प्राचीन और पवित्र उपासना विधि है। 'यज्ञो वै विष्णुः' — यज्ञ ही विष्णु है। मंदिर में यज्ञ विशेष शुभ माना जाता है।
यज्ञ और हवन का अंतर
- ▸हवन (होम): छोटा अग्नि अनुष्ठान — एक कुंड, कम समय
- ▸यज्ञ: विस्तृत — एक या अनेक कुंड, अनेक पुरोहित, लम्बी अवधि
- ▸सामान्यतः दोनों शब्द एक-दूसरे के पर्याय में प्रयुक्त
मंदिर में यज्ञ करवाने का विधान
1प्रकार चयन
- ▸गणपति यज्ञ — विघ्न निवारण (प्रारम्भ सर्वदा गणपति से)
- ▸नवग्रह यज्ञ — ग्रह दोष शान्ति
- ▸रुद्र यज्ञ — शिव कृपा, रोग-शत्रु नाश
- ▸सत्यनारायण यज्ञ — सर्वमंगल
- ▸वास्तु यज्ञ — गृह शान्ति
- ▸अग्निहोत्र — नित्य (सरलतम)
- ▸महायज्ञ — विशेष अवसर (सहस्र कुंड आदि)
2पूर्व तैयारी
- ▸मंदिर प्रशासन/मुख्य पुरोहित से सम्पर्क
- ▸शुभ मुहूर्त (ज्योतिषी से)
- ▸योग्य वेदपाठी पुरोहित/आचार्य
- ▸यज्ञ सामग्री (कुंड, समिधा, घी, सामग्री)
- ▸बजट निर्धारण
3सामान्य विधि
- ▸वेदी निर्माण — यज्ञ कुंड (चौकोर/गोल)
- ▸कलश स्थापना — नवग्रह/दिक्पाल
- ▸संकल्प — यजमान (नाम, गोत्र, उद्देश्य)
- ▸अग्नि स्थापना — वैदिक मंत्रों से अग्नि प्रज्वलित
- ▸प्रधान होम — मुख्य मंत्रों के साथ आहुतियाँ
- ▸पूर्णाहुति — अंतिम आहुति (नारियल+घी+सामग्री)
- ▸शान्ति पाठ — 'ॐ द्यौः शान्तिः...'
- ▸प्रसाद वितरण + ब्राह्मण भोजन + दक्षिणा
4आहुतियों की संख्या
- ▸सामान्य: 108 या 1008
- ▸विशेष: 10,000 / 1,00,000
- ▸दशांश नियम: मंत्र जप का 10% = हवन आहुति
5यज्ञ काल
- ▸एक दिन (सामान्य)
- ▸3 दिन, 5 दिन, 7 दिन, 9 दिन (विस्तृत)
- ▸अनुष्ठान अनुसार भिन्न
6दक्षिणा
पुरोहितों की संख्या, यज्ञ के प्रकार, और स्थानीय परम्परा अनुसार — पूर्व चर्चा करें।
7सावधानियाँ
- ▸यज्ञ कुंड में अग्नि सम्भालकर — अग्नि सुरक्षा
- ▸आहुति देते समय 'स्वाहा' + 'इदं न मम' (यह मेरा नहीं)
- ▸यज्ञ काल में ब्रह्मचर्य और सात्विक आहार
- ▸धुएँ से सावधानी — दमा/श्वास रोगी दूर बैठें





